यज्ञ दान तप: कर्म न त्याज्यं कार्यमेव तत्
यज्ञो दानं तपश्चैव पावनानि मनीषिणाम्
यज्ञ,दान और तपरूप कर्म त्याग करने के योग्य नहीं हैं,बल्कि वह तो अवश्य कर्तव्य हैं.क्यूंकि यज्ञ,दान और तप - ये तीनों ही कर्म बुद्धिमान पुरुषों को पवित्र करनेवाले हैं.
उपरोक्त श्लोक श्रीमद्भगवद्गीता के अध्याय १८ का पांचवां श्लोक है.जिसमें भगवान श्रीकृष्ण ने अपना निश्चय किया हुआ उत्तम मत प्रकट किया है कि 'यज्ञ ,दान और तपरूप कर्मों को तथा और भी सम्पूर्ण कर्मों को आसक्ति और फलों का त्याग करते हुए अवश्य ही करना चाहिये'. इस श्लोक पर यदि चिंतन किया जाए तो हम पायेंगें कि यह हमारे सम्पूर्ण जीवन के लिए मूल मन्त्र है.
'तप' का अर्थ उन बातों को सीखते (Learn) रहना है जो हमें जीवन में स्थाई (permanent)चेतन आनंद यानि ईश्वर प्राप्ति की ओर अग्रसर करती रहें.तप करने में शरीर,मन ,बुद्धि,वाणी,कर्म सभी को सदा साधते रहना पड़ता है.इसलिए जीवन के हर स्तर पर सीखने के लिए तत्पर रहने की आवश्यकता है.अस्थाई (temporary) आनंद के लिए किया गया तप निरर्थक और क्लेश मात्र ही है.ब्लॉग्गिंग में सार्थक पोस्ट और टिपण्णी लिखने का प्रयास एक सुन्दर तप ही है.
'यज्ञ' का अर्थ सीखे हुए को पूर्ण मनोयोग से आनंदपूर्वक करते रहना ( execute smoothly) है.यदि हम ऐसा नहीं करेंगें तो हमने जो सीखा उसे शीघ्र भुला देंगें.यज्ञ करते रहने से आनंद की वृष्टि होती है जिससे सर्वत्र पोषण होता है.इसलिए यज्ञ की भी हमेशा ही आवश्यकता है.श्रीमद्भगवद्गीता में अनेक प्रकार के यज्ञ बतलाये गए हैं .यथा 'द्रव्य यज्ञ, स्वाध्याय यज्ञ,जपयज्ञ ,ज्ञान यज्ञ आदि आदि.जिनमें 'ज्ञान यज्ञ' सर्वश्रेष्ठ यज्ञ और जप यज्ञ को भगवान ने अपना स्वरुप ही बतलाया है.ब्लॉग जगत में 'ज्ञान यज्ञ' किया जाना अभीष्ठ और श्रेष्ठ प्रयास है.
'तप' और 'यज्ञ' करते रहने से ज्ञान और अनुभव अर्जित होता जाता है.यदि अर्जित ज्ञान और अनुभव का वितरण (distribution)/दान न हो तो यह निरर्थक रह सकता है .इसलिए ज्ञान और अनुभव को सुयोग्य पात्र
को 'दान' करने की भी परम आवश्यकता है.यह सुयोग्य पात्र एक 'learner' या तपस्वी होता है. अपने अपने ज्ञान और अनुभव का ब्लॉग जगत में अपनी पोस्टों और टिप्पणियों के माध्यम से वितरण किया जाए तो
यह जिज्ञासु जन/learners के लिए सुन्दर दान है.
मैंने अपने ब्लॉग का नाम 'मनसा वाचा कर्मणा' इसी उद्देश्य से रक्खा है कि मन से,वाणी से और कर्म
से मैं आप सभी सुधिजनों के साथ सदा सीखने के लिए चेष्टारत रह सकूँ.माह फरवरी २०११ में मैंने अपनी
पहली पोस्ट 'ब्लॉग जगत में मेरा पदार्पण' लिखी थी.दूसरी पोस्ट 'जीवन की सफलता अपराध बोध से मुक्ति',तीसरी 'मन ही मुक्ति का द्वार है' ,चौथी 'मो को कहाँ ढूंढता रे बन्दे'.
फिर मार्च २०११ में 'मुद मंगलमय संत समाजू',' ऐसी वाणी बोलिए' और 'बिनु सत्संग बिबेक न होई' लिखीं.
अप्रैल में 'वंदे वाणी विनायकौ','रामजन्म -आध्यात्मिक चिंतन-१' व
'रामजन्म-आध्यात्मिक चिंतन-२'.
मई २०११ में 'रामजन्म-आध्यात्मिक चिंतन-३' व 'रामजन्म- आध्यात्मिक चिंतन-४',
जून,जुलाई, अगस्त,सितम्बर और अक्टूबर २०११ में 'सीता जन्म -आध्यात्मिक चिंतन-१'
'सीता जन्म -आध्यात्मिक चिंतन-२','सीता जन्म-आध्यात्मिक चिंतन-३',
'सीता जन्म -आध्यात्मिक चिंतन-४' व 'सीता जन्म आध्यात्मिक चिंतन-५'
माह नवम्बर और दिसम्बर २०११ में 'हनुमान लीला -भाग १' और 'हनुमान लीला -भाग २' लिखीं.
और माह जनवरी २०१२ में ब्लॉग्गिंग में एक वर्ष पूर्ण करने से पूर्व 'हनुमान लीला भाग-३' लिखी.
इस प्रकार कुल २० पोस्ट ही मेरे द्वारा लिखीं गयीं जिन पर आप सुधिजनों ने अपने सुवचनों का
अनुपम 'दान' और भरपूर सहयोग मुझे दिया है.यह मेरे लिए अत्यंत हर्ष और उत्साह की बात है
कि मैं आपका कृपा पात्र बन सका.इसके लिए मैं आप सभी का हृदय से आभारी हूँ और सदा ही रहूँगा.
मैं यह भी आग्रह करूँगा कि जिन सुधिजनों की उपरोक्त पोस्ट में से कोई पोस्ट पढ़ने से रह गयीं हों तो
वे एक बार उस पोस्ट को पढकर अपने सुविचार प्रकट अवश्य करें.
मैं सदा प्रयासरत रहना चाहूँगा कि आप सभी के साथ सत्संग के माध्यम से एक दुसरे से सीखना जारी रहे
और 'तप', यज्ञ' और 'दान' के माध्यम से हम अपने अपने जीवन को सुखमय,आनन्दित व पावनमय बनाने
में भगवान कृष्ण के उपरोक्त उत्तम मत को अपने हृदय में धारण कर सकें. आप अपना अमूल्य समय
निकाल कर मेरे ब्लॉग पर आते हैं,और सुन्दर टिपण्णी से मेरे प्रयास को यज्ञ का स्वरुप प्रदान करते हैं
इससे आनंद की वृष्टि होती है.मैं भी आपके ब्लोग्स पर जाकर टिपण्णी करने का यथा संभव प्रयास
करता हूँ.सभी सुधिजनों की सभी पोस्ट पर नहीं जा पाता हूँ,इसका मुझे खेद है. डेश बोर्ड पर भी आपकी
पोस्ट बहुत बार चूक जातीं हैं.सभी से अनुरोध है कि आप अपनी पोस्ट की सुचना मेरे ब्लॉग पर अपनी
टिपण्णी के साथ भी दें तो आसानी रहेगी.मैं भी अपनी पोस्ट की सूचना आपके ब्लॉग पर अक्सर दे देता हूँ.
यदि सूचना के बाबजूद नियमित पाठक नहीं आतें हैं तो मुझे चिंता और निराशा होती है.चिंता उनके
कुशल मंगल के विषय में जानने की व निराशा उनके अनमने या नाराज होने की.यदि मेरी किसी भी बात से
आपको नाराजगी हुई हो तो इसके लिए मैं क्षमा प्रार्थी हूँ.अपनी नाराजगी यदि आप मुझे बताएं तो मैं
उसको यथा संभव दूर करने का प्रयत्न करूँगा.परन्तु,आपका अकारण नाराज होना और अनुपस्थित रहना
मुझे व्यथित करता है.मैं आप सभी को यह भी बतलाना चाहूँगा कि इंटरनेट और कंप्यूटर की मुझे
अति अल्प जानकारी है.इस सम्बन्ध में मुझे समय समय पर 'खुशदीप भाई' 'केवल राम जी','शिल्पा बहिन' और 'वंदना जी का सहयोग मिलता रहा है.इसके लिए मैं उनका हृदय से आभारी हूँ.
ब्लॉग जगत में हम सब का सकारात्मक मिलन परम सौभाग्य की बात है. पोस्ट,टिपण्णी व प्रति टिपण्णी
द्वारा ही सुन्दर 'वाद' की सृष्टि होती है ,जो 'परमात्मा' अर्थात 'सत्-चित -आनंद' की एक उत्तम विभूति ही है.
ब्लॉग्गिंग की प्रथम वर्ष गाँठ पर 'मेरी बात' पढ़ने के लिए आप सभी का पुनः बहुत बहुत हार्दिक आभार
और धन्यवाद.
आज ही मेरे बेटे पारस का पच्चीसवां जन्म दिवस भी है.
जय जय जय हनुमान गुसाईं, कृपा करो गुरु देव की नाईं
अगली पोस्ट भी मैं 'हनुमान लीला' पर ही जारी रखना चाहूँगा.
आप सभी की कृपा और आशीर्वाद का सैदेव आकांक्षी
राकेश कुमार.
यज्ञो दानं तपश्चैव पावनानि मनीषिणाम्
यज्ञ,दान और तपरूप कर्म त्याग करने के योग्य नहीं हैं,बल्कि वह तो अवश्य कर्तव्य हैं.क्यूंकि यज्ञ,दान और तप - ये तीनों ही कर्म बुद्धिमान पुरुषों को पवित्र करनेवाले हैं.
उपरोक्त श्लोक श्रीमद्भगवद्गीता के अध्याय १८ का पांचवां श्लोक है.जिसमें भगवान श्रीकृष्ण ने अपना निश्चय किया हुआ उत्तम मत प्रकट किया है कि 'यज्ञ ,दान और तपरूप कर्मों को तथा और भी सम्पूर्ण कर्मों को आसक्ति और फलों का त्याग करते हुए अवश्य ही करना चाहिये'. इस श्लोक पर यदि चिंतन किया जाए तो हम पायेंगें कि यह हमारे सम्पूर्ण जीवन के लिए मूल मन्त्र है.
'तप' का अर्थ उन बातों को सीखते (Learn) रहना है जो हमें जीवन में स्थाई (permanent)चेतन आनंद यानि ईश्वर प्राप्ति की ओर अग्रसर करती रहें.तप करने में शरीर,मन ,बुद्धि,वाणी,कर्म सभी को सदा साधते रहना पड़ता है.इसलिए जीवन के हर स्तर पर सीखने के लिए तत्पर रहने की आवश्यकता है.अस्थाई (temporary) आनंद के लिए किया गया तप निरर्थक और क्लेश मात्र ही है.ब्लॉग्गिंग में सार्थक पोस्ट और टिपण्णी लिखने का प्रयास एक सुन्दर तप ही है.
'यज्ञ' का अर्थ सीखे हुए को पूर्ण मनोयोग से आनंदपूर्वक करते रहना ( execute smoothly) है.यदि हम ऐसा नहीं करेंगें तो हमने जो सीखा उसे शीघ्र भुला देंगें.यज्ञ करते रहने से आनंद की वृष्टि होती है जिससे सर्वत्र पोषण होता है.इसलिए यज्ञ की भी हमेशा ही आवश्यकता है.श्रीमद्भगवद्गीता में अनेक प्रकार के यज्ञ बतलाये गए हैं .यथा 'द्रव्य यज्ञ, स्वाध्याय यज्ञ,जपयज्ञ ,ज्ञान यज्ञ आदि आदि.जिनमें 'ज्ञान यज्ञ' सर्वश्रेष्ठ यज्ञ और जप यज्ञ को भगवान ने अपना स्वरुप ही बतलाया है.ब्लॉग जगत में 'ज्ञान यज्ञ' किया जाना अभीष्ठ और श्रेष्ठ प्रयास है.
'तप' और 'यज्ञ' करते रहने से ज्ञान और अनुभव अर्जित होता जाता है.यदि अर्जित ज्ञान और अनुभव का वितरण (distribution)/दान न हो तो यह निरर्थक रह सकता है .इसलिए ज्ञान और अनुभव को सुयोग्य पात्र
को 'दान' करने की भी परम आवश्यकता है.यह सुयोग्य पात्र एक 'learner' या तपस्वी होता है. अपने अपने ज्ञान और अनुभव का ब्लॉग जगत में अपनी पोस्टों और टिप्पणियों के माध्यम से वितरण किया जाए तो
यह जिज्ञासु जन/learners के लिए सुन्दर दान है.
मैंने अपने ब्लॉग का नाम 'मनसा वाचा कर्मणा' इसी उद्देश्य से रक्खा है कि मन से,वाणी से और कर्म
से मैं आप सभी सुधिजनों के साथ सदा सीखने के लिए चेष्टारत रह सकूँ.माह फरवरी २०११ में मैंने अपनी
पहली पोस्ट 'ब्लॉग जगत में मेरा पदार्पण' लिखी थी.दूसरी पोस्ट 'जीवन की सफलता अपराध बोध से मुक्ति',तीसरी 'मन ही मुक्ति का द्वार है' ,चौथी 'मो को कहाँ ढूंढता रे बन्दे'.
फिर मार्च २०११ में 'मुद मंगलमय संत समाजू',' ऐसी वाणी बोलिए' और 'बिनु सत्संग बिबेक न होई' लिखीं.
अप्रैल में 'वंदे वाणी विनायकौ','रामजन्म -आध्यात्मिक चिंतन-१' व
'रामजन्म-आध्यात्मिक चिंतन-२'.
मई २०११ में 'रामजन्म-आध्यात्मिक चिंतन-३' व 'रामजन्म- आध्यात्मिक चिंतन-४',
जून,जुलाई, अगस्त,सितम्बर और अक्टूबर २०११ में 'सीता जन्म -आध्यात्मिक चिंतन-१'
'सीता जन्म -आध्यात्मिक चिंतन-२','सीता जन्म-आध्यात्मिक चिंतन-३',
'सीता जन्म -आध्यात्मिक चिंतन-४' व 'सीता जन्म आध्यात्मिक चिंतन-५'
माह नवम्बर और दिसम्बर २०११ में 'हनुमान लीला -भाग १' और 'हनुमान लीला -भाग २' लिखीं.
और माह जनवरी २०१२ में ब्लॉग्गिंग में एक वर्ष पूर्ण करने से पूर्व 'हनुमान लीला भाग-३' लिखी.
इस प्रकार कुल २० पोस्ट ही मेरे द्वारा लिखीं गयीं जिन पर आप सुधिजनों ने अपने सुवचनों का
अनुपम 'दान' और भरपूर सहयोग मुझे दिया है.यह मेरे लिए अत्यंत हर्ष और उत्साह की बात है
कि मैं आपका कृपा पात्र बन सका.इसके लिए मैं आप सभी का हृदय से आभारी हूँ और सदा ही रहूँगा.
मैं यह भी आग्रह करूँगा कि जिन सुधिजनों की उपरोक्त पोस्ट में से कोई पोस्ट पढ़ने से रह गयीं हों तो
वे एक बार उस पोस्ट को पढकर अपने सुविचार प्रकट अवश्य करें.
मैं सदा प्रयासरत रहना चाहूँगा कि आप सभी के साथ सत्संग के माध्यम से एक दुसरे से सीखना जारी रहे
और 'तप', यज्ञ' और 'दान' के माध्यम से हम अपने अपने जीवन को सुखमय,आनन्दित व पावनमय बनाने
में भगवान कृष्ण के उपरोक्त उत्तम मत को अपने हृदय में धारण कर सकें. आप अपना अमूल्य समय
निकाल कर मेरे ब्लॉग पर आते हैं,और सुन्दर टिपण्णी से मेरे प्रयास को यज्ञ का स्वरुप प्रदान करते हैं
इससे आनंद की वृष्टि होती है.मैं भी आपके ब्लोग्स पर जाकर टिपण्णी करने का यथा संभव प्रयास
करता हूँ.सभी सुधिजनों की सभी पोस्ट पर नहीं जा पाता हूँ,इसका मुझे खेद है. डेश बोर्ड पर भी आपकी
पोस्ट बहुत बार चूक जातीं हैं.सभी से अनुरोध है कि आप अपनी पोस्ट की सुचना मेरे ब्लॉग पर अपनी
टिपण्णी के साथ भी दें तो आसानी रहेगी.मैं भी अपनी पोस्ट की सूचना आपके ब्लॉग पर अक्सर दे देता हूँ.
यदि सूचना के बाबजूद नियमित पाठक नहीं आतें हैं तो मुझे चिंता और निराशा होती है.चिंता उनके
कुशल मंगल के विषय में जानने की व निराशा उनके अनमने या नाराज होने की.यदि मेरी किसी भी बात से
आपको नाराजगी हुई हो तो इसके लिए मैं क्षमा प्रार्थी हूँ.अपनी नाराजगी यदि आप मुझे बताएं तो मैं
उसको यथा संभव दूर करने का प्रयत्न करूँगा.परन्तु,आपका अकारण नाराज होना और अनुपस्थित रहना
मुझे व्यथित करता है.मैं आप सभी को यह भी बतलाना चाहूँगा कि इंटरनेट और कंप्यूटर की मुझे
अति अल्प जानकारी है.इस सम्बन्ध में मुझे समय समय पर 'खुशदीप भाई' 'केवल राम जी','शिल्पा बहिन' और 'वंदना जी का सहयोग मिलता रहा है.इसके लिए मैं उनका हृदय से आभारी हूँ.
ब्लॉग जगत में हम सब का सकारात्मक मिलन परम सौभाग्य की बात है. पोस्ट,टिपण्णी व प्रति टिपण्णी
द्वारा ही सुन्दर 'वाद' की सृष्टि होती है ,जो 'परमात्मा' अर्थात 'सत्-चित -आनंद' की एक उत्तम विभूति ही है.
ब्लॉग्गिंग की प्रथम वर्ष गाँठ पर 'मेरी बात' पढ़ने के लिए आप सभी का पुनः बहुत बहुत हार्दिक आभार
और धन्यवाद.
आज ही मेरे बेटे पारस का पच्चीसवां जन्म दिवस भी है.
जय जय जय हनुमान गुसाईं, कृपा करो गुरु देव की नाईं
अगली पोस्ट भी मैं 'हनुमान लीला' पर ही जारी रखना चाहूँगा.
आप सभी की कृपा और आशीर्वाद का सैदेव आकांक्षी
राकेश कुमार.
वाह! आपकी 'फुहार...फागुन लहराया'
ReplyDeleteतो मस्त मस्त है धीरेन्द्र जी.
आभार.
आपकी नई पोस्ट तो मस्त मस्त है जी.
ReplyDeleteबहुत बहुत आभार.
आदरणीय श्री राकेश जी, प्रणाम स्वीकार करें
ReplyDeleteब्लॉग्गिंग की प्रथम वर्षगांठ की बहुत बहुत शुभकामनायसुन्दर प्रस्तुित... आभार!
आप को सपरिवार होली की शुभ कामनायें .............
"आपका सवाई "
happy holi
ReplyDeleteand congrats for the one year
sm has left a new comment on the post "मेरी बात - ब्लॉग्गिंग की प्रथम वर्षगाँठ":
ReplyDeletehappy holi
and congrats for the one year
ब्लागिंग को एक वर्ष पूरा करने पर बधाई !
ReplyDeleteआशा है आप आगे भी इसी तरह अपनी ज्ञान वर्धक पोस्ट से ब्लाग जगत को समृद्ध करते रहेंगे !
शुभकामनायें !
ज्ञानचंद मर्मज्ञ has left a new comment on your post "मेरी बात - ब्लॉग्गिंग की प्रथम वर्षगाँठ":
ReplyDeleteब्लागिंग को एक वर्ष पूरा करने पर बधाई !
आशा है आप आगे भी इसी तरह अपनी ज्ञान वर्धक पोस्ट से ब्लाग जगत को समृद्ध करते रहेंगे !
शुभकामनायें !
Holi ki hardik shubhkamnaye Rakesh ji apke aur apke pure parivar ko. 'My yatra diary' par apke pavan shabdpushp barsane ke liye bahut bahut aabhar. Apki agli post ka intezaar hain. Jald kijiyega.
ReplyDeleteएक वर्ष पूरा होने पर बधाई एवं पारस को भी जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...
ReplyDeleteआपको सपरिवार होली की हार्दिक शुभकामनायें!
ReplyDeleteधन्यवाद राकेश जी... आपको जो महसूस होता हो अगर प्रभु कृपा रही तो सच मुझे सच्चा संत बनना पसंद है .. लेकिन अभी उस आग में पकना है .जाने कहाँ कहाँ मोह पथ भ्रमित कर जाएँ ... लेकिन चाहूंगी की मैं उस ह्रदय से ऊपर उठ जाऊं जहां मोह क्रोध और और किसी का बुरा किया हुवा कर्म अपने दिल पर प्रभाव छोड़ता हो... आपके ब्लॉग में आ कर हमें कफी कुछ सीखने समझने को मिलता है... आप का अच्छे स्तरीय लेखों के लिए सादर आभार ... होली मंगलमयी और रंगभरी हुवी हो यही आशा है..
ReplyDeleteमंगलकामनाएं ..
ReplyDeleteचि० पारस की पच्चीसवीं सालगिरह पर ढेरों शुभ कामनाएं.
ReplyDeleteMY RESENT POST ...काव्यान्जलि ...:बसंती रंग छा गया,...
pratham varshgaanth par bahut bahut hardik badhai sweekar karen...
ReplyDeleteapka pavitr lekhan chalta rahe...hardik kamna hai.
pratam varshgaanth par bahut bahut hardik badhai...
ReplyDeleteapka pavitra lekhan chalta rahe...hardik kamna hai.
नमन आपकी भाई जी ...
ReplyDeleteBLOGING KI PRATHAM VARGATHH PAR HARDIK SHUBHKAMNAYE.PARAS JI KO BHI JANM-DIVAS KI HARDIK SHUBHKAMNAYEN .HOCKEY KA JUNOON
ReplyDeleteपारस को पचीसवीं वर्षगाँठ पर बहुत-बहुत बधाई, मेरी बात की प्रथम वर्षगाँठ पर आपको कोटिश: बधाई.
ReplyDeleteब्लॉग आग है हवन की टिप्पणियाँ हवि शुद्ध
पठन मनन के यज्ञ में शामिल होत प्रबुद्ध.
शामिल होत प्रबुद्ध , परस्पर प्रेम भाव से
विविध विषय की पोस्ट को पढ़ते बड़े चाव से
नित नवीन रिश्तों में निर्मल अनुराग है
टिप्पणियाँ हवि शुद्ध हवन की ब्लॉग आग है.
वाह...वाह...वाह...
ReplyDeleteसुन्दर प्रस्तुति.....बहुत बहुत बधाई...
बहुत ही बेहतरीन और प्रशंसनीय प्रस्तुति....
ReplyDeleteइंडिया दर्पण की ओर से शुभकामनाएँ।
bahut din ho gye rakesh jee mere blog pr aaye apni nai rachna ko kb padhne ka mauka denge?
ReplyDeletethanks rakesh gee apne swasthya ka dhyan rakhiye.
ReplyDeleteThanks for your wishes Sir, I apologize for the late acknowledgment.
ReplyDeleteशुक्रिया ऋता जी.
ReplyDeletebahut hi acha likhte hai aap, bdhaai
ReplyDeleteआखिरी ख़त: par aap ka swaagat hai
Rakesh Kumar ji, Bahut din ho gaye aapki post nahi aayi. Asha hai ki jald ayegi.
ReplyDeleteHappy Gudi Padwa.
Aaj se mere blog pe Braj Yatra aarambh ho rahi hai.
Rakesh Kumar ji, Bahut din ho gaye aapki post nahi aayi. Asha hai ki jald ayegi.
ReplyDeleteHappy Gudi Padwa.
Aaj se mere blog pe Braj Yatra aarambh ho rahi hai.
Rakesh Kumar ji, Bahut din ho gaye aapki post nahi aayi. Asha hai ki jald ayegi.
ReplyDeleteHappy Gudi Padwa.
Aaj se mere blog pe Braj Yatra aarambh ho rahi hai.
Rakesh Kumar ji, Bahut din ho gaye aapki post nahi aayi. Asha hai ki jald ayegi.
ReplyDeleteHappy Gudi Padwa.
Aaj se mere blog pe Braj Yatra aarambh ho rahi hai.
Rakesh Kumar ji, Bahut din ho gaye aapki post nahi aayi. Asha hai ki jald ayegi.
ReplyDeleteHappy Gudi Padwa.
Aaj se mere blog pe Braj Yatra aarambh ho rahi hai.
बधाईयाँ और शुभकामनाएं. पूर्व में भी प्रयास किया था की कुछ कह दूँ. नहीं हो पाया.
ReplyDeleteबहुत बढ़िया,बेहतरीन करारी अच्छी प्रस्तुति,..
ReplyDeleteनवरात्र के ४दिन की आपको बहुत बहुत सुभकामनाये माँ आपके सपनो को साकार करे
आप ने अपना कीमती वकत निकल के मेरे ब्लॉग पे आये इस के लिए तहे दिल से मैं आपका शुकर गुजर हु आपका बहुत बहुत धन्यवाद्
मेरी एक नई मेरा बचपन
कुछ अनकही बाते ? , व्यंग्य: मेरा बचपन:
http://vangaydinesh.blogspot.in/2012/03/blog-post_23.html
दिनेश पारीक
आपको एव आपके परिवारजनो को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाये !
ReplyDeleteआप का ब्लॉग बार बार पढने के लिये अपनी ओर खींच लाता है...आभार
ReplyDeletehttp://aadhyatmikyatra.blogspot.in/
आपके नए पोस्ट के इन्तजार में,.....
ReplyDeleteMY RECENT POST...काव्यान्जलि ...: तुम्हारा चेहरा,
MY RECENT POST ...फुहार....: बस! काम इतना करें....
श्री राम जन्म की बधाईयाँ :) शुभकामनाएं |
ReplyDeleteअरे भैया - नहीं जानती थी की यह टिपण्णी प्रकाशित हो गयी है | तब तो शायद स्पैम खाते में छुप गयी थी | शब्दों का शिल्प - आजकल तो बन नहीं रहा बड़े दिन से :) बनेगा - तो ज़रूर लिखूंगी :)
ReplyDeleteप्रणाम | रामनवमी की बधाईयाँ |
.सुन्दर प्रस्तुति ! धन्यवाद ! मेरे नए पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा । धन्यवाद ।
ReplyDeleteवर्ष गांठ के साथ साथ अब तक सबसे अधिक कमेंट्स प्राप्त करने की भी बधाई आपको .....
ReplyDeleteबहुत सुन्दर प्रस्तुति !
ReplyDeleteमेरे ब्लॉग कि नवीनतम पोस्ट के लिए यहाँ क्लिक करे. !
manojbijnori12.blogspot.com
राकेश जी ,..आपके नए पोस्ट के इन्तजार में ,..
ReplyDeleteबहुत दिनों से मेरे पोस्ट पर आपका आना नही हुआ,...
आइये आपका स्वागत है,....
MY RECENT POST...फुहार....: दो क्षणिकाऐ,...
MY RECENT POST...काव्यान्जलि ...: मै तेरा घर बसाने आई हूँ...
अच्छी प्रस्तुति,..बहुत दिनों से मेरे पोस्ट पर आना नही हुआ,..
ReplyDeleteआइये स्वागत है,...
MY RECENT POST...फुहार....: दो क्षणिकाऐ,...
MY RECENT POST...काव्यान्जलि ...: मै तेरा घर बसाने आई हूँ...
अगली पोस्ट की प्रतीक्षा में । सोचा था हनुमान जयंती पर आयेगी ।
ReplyDeleteआज 08/04/2012 को आपका ब्लॉग नयी पुरानी हलचल पर (सुनीता शानू जी की प्रस्तुति में) लिंक किया गया हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
ReplyDeleteधन्यवाद!
आद.राकेश कुमार जी,
ReplyDeleteप्रणाम,
माफ़ करना यह पोस्ट मैने आज ही देखी ! यह देखकर बड़ा सुखद लगा की ब्लॉग जगत में एक वर्ष पूरा हो गया इस लिए आपको हमारी तरफ से और सुगना फाऊंडेशन मेघलासिया,"राजपुरोहित समाज" आज का आगरा और एक्टिवे लाइफ ,एक ब्लॉग सबका ब्लॉग परिवार की तरफ से भी हार्दिक शुभकामनाएं ॥
आपका
सवाई सिंह{आगरा }
आद.पारसजी को पचीसवीं वर्षगाँठ पर बहुत-बहुत बधाई
ReplyDeleteआद.राकेश कुमार जी,
ReplyDeleteप्रणाम,
माफ़ करना यह पोस्ट मैने आज ही देखी ! यह देखकर बड़ा सुखद लगा की ब्लॉग जगत में एक वर्ष पूरा होगया इस लिए आपको हमारी तरफ से और सुगना फाऊंडेशन मेघलासिया,"राजपुरोहित समाज" आज का आगरा और एक्टिवे लाइफ ,एक ब्लॉग सबका ब्लॉग परिवार की तरफ से भी हार्दिक शुभकामनाएं ॥
आपका
सवाई सिंह{आगरा } होने पर हार्दिक बधाई
आद.राकेश कुमार जी,
ReplyDeleteप्रणाम,
माफ़ करना यह पोस्ट मैने आज ही देखी ! यह देखकर बड़ा सुखद लगा की ब्लॉग जगत में एक वर्ष पूरा होगया इस लिए आपको हमारी तरफ से और सुगना फाऊंडेशन मेघलासिया,"राजपुरोहित समाज" आज का आगरा और एक्टिवे लाइफ
,एक ब्लॉग सबका ब्लॉग परिवार की तरफ से भी हार्दिक शुभकामनाएं ॥
आपका
सवाई सिंह{आगरा }
baar baar aapke blog par aate hain aaur laut jaate hain aaj poore 54 dino se aapkee post pahne ko nahi mili hai...ab jyada intezaar mat karwaiye...sadar pranam ke sath
ReplyDeleteआदरणीय गुरु जी नमस्ते ...देर से आने के लिए क्षमा चाहता हूँ .कार्यों में मानसिक रूप से आत्यधिक व्यस्त होने के कारण आज कल मै नेट पर उपस्थित नहीं हो पा रहा हूँ किन्तु फिर भी कभी भूले भटके आपका प्यार यहाँ खिंच ही लाता है..... आपके वचनों को पढ़ना अत्यंत सुखद लगता है तथा बहुत कुछ सिखने को भी मिलता है . ब्लॉग के एक वर्ष पूर्ण होने पर बधाई साथ-साथ पारस को भी उनके जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनायें!
ReplyDeleteSadev hi yahan aane par ek alag shanti ki anoobhooti hoti hai... kripaya karke apni agli prastuti jald hi preshit kijiyega Rakesh Kumar ji,
ReplyDeleteAapke mangalmaye din ki aasha karti hoon ~ Arti
बहुत सुन्दर...सर
ReplyDeleteबहुत बहुत बधाई...
ReplyDeleteThis comment has been removed by the author.
ReplyDeleteआदरणीय राकेश जी जय श्री राधे मन में मलाल है की इतनी देर से मै क्यों पहुंचा मनसा वाचा कर्मणा में ...आप की बातें बहुत प्यारी लगीं ..हम लोग भी ब्लॉग जगत में सीखने के लिए आये हैं और आप जैसे प्रेमी जन के सानिध्य से कुछ न कुछ सीखने का मन बना रहता है समयाभाव वश हर जगह हर समय पहुँच पाना दूभर होता है पर पढने की तमन्ना बनी रहती है कोशिश जारी रहेगी ..अपना स्नेह व् सुझाव देंगे तो कृपा होगी ..शुभ कामनाएं
ReplyDeleteभ्रमर ५
भ्रमर का दर्द और दर्पण
आदरणीय राकेश जी जय श्री राधे मन में मलाल है की इतनी देर से मै क्यों पहुंचा मनसा वाचा कर्मणा में ...आप की बातें बहुत प्यारी लगीं ..हम लोग भी ब्लॉग जगत में सीखने के लिए आये हैं और आप जैसे प्रेमी जन के सानिध्य से कुछ न कुछ सीखने का मन बना रहता है समयाभाव वश हर जगह हर समय पहुँच पाना दूभर होता है पर पढने की तमन्ना बनी रहती है कोशिश जारी रहेगी .
ReplyDelete.अपना स्नेह व् सुझाव देंगे तो कृपा होगी ..शुभ कामनाएं ..अब हनुमान जी की लीला का रस पान होगा ...
भ्रमर ५
भ्रमर का दर्द और दर्पण
bahut hi sundar post lagi ab agle post ki prateeksha hai sir
ReplyDeleteसबसे पहले पोस्ट पर न आ सकने कि माफ़ी चाहती हूँ बेटे की तबियत ठीक न होने की वजह से काफी वक्त तक कोई गतिविधि न रही ...........आपको ब्लागजगत में एक साल पुरे करने की हार्दिक शुभकामनायें |
ReplyDeleteब्लॉग लेखन की प्रथम वर्षगाँठ की बहुत बहुत शुभकामनायें ..........आपका लिखित पढकर एक पारलौकिक आनंद मिलता है !
ReplyDeleteभाई साहब बधाई हो आपको भी और आपके पुत्र को भी...
ReplyDeleteबढ़िया प्रस्तुति
बहोत अच्छा लेख
ReplyDeletehttp://Hindi Dunia Blog (New Blog)
आपके पुत्र को जन्मदिवस की शुभकामनाये!
ReplyDeleteसादर
इला
Valentine Day Gifts Online
ReplyDelete